वैज्ञानिकों ने एक नया कम्प्यूटेशनल ढांचा विकसित किया है, जो दुर्लभ आणविक घटनाओं के अनुकरण (सिमुलेशन) को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज बना सकता है। यह प्रगति कंप्यूटर-सहायता प्राप्त दवा खोज और फार्मास्युटिकल रिसर्च के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
पैथजेनी नामक इस नई पद्धति को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान एस.एन. बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ केमिकल थ्योरी एंड कम्प्यूटेशन में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, पैथजेनी आणविक सिमुलेशन की एक पुरानी चुनौती को हल करता है—दवा के अणुओं का अपने लक्ष्य प्रोटीन से अलग होने की प्रक्रिया का सटीक मॉडल तैयार करना। इस प्रक्रिया को लिगैंड अनबाइंडिंग कहा जाता है, जो यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि कोई दवा शरीर में कितनी देर तक प्रभावी रहेगी। कई मामलों में दवा की प्रभावशीलता के लिए यह अवधि, बंधन शक्ति से भी अधिक महत्वपूर्ण होती है।
लिगैंड अनबाइंडिंग जैसी घटनाओं का सिमुलेशन करना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि ये मिलीसेकंड से लेकर सेकंड तक के लंबे समय अंतराल में घटित होती हैं। पारंपरिक आणविक गतिकी सिमुलेशन, यहां तक कि शक्तिशाली कंप्यूटिंग संसाधनों के साथ भी, इन दुर्लभ घटनाओं को पकड़ने में असफल रहते हैं। मौजूदा तकनीकों में अक्सर प्रक्रिया को तेज करने के लिए कृत्रिम बल या उच्च तापमान का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वास्तविक भौतिकी विकृत हो सकती है और परिणामों की सटीकता प्रभावित होती है।
नया पैथजेनी ढांचा इन सीमाओं से बचने के लिए दिशा-निर्देशित अनुकूली नमूनाकरण (Directed Adaptive Sampling) दृष्टिकोण अपनाता है। इसमें आणविक गति को जबरन नियंत्रित करने के बजाय, एल्गोरिदम बड़ी संख्या में बेहद छोटे और निष्पक्ष सिमुलेशन प्रक्षेप पथ चलाता है। केवल उन्हीं प्रक्षेप पथों को आगे बढ़ाया जाता है जो स्वाभाविक रूप से लक्ष्य परिणाम की ओर अग्रसर होते हैं, जबकि बाकी को हटा दिया जाता है।
यह चयनात्मक विस्तार रणनीति प्राकृतिक आणविक गतिज मार्गों को बनाए रखते हुए लंबे प्रतीक्षा समय को पार कर जाती है। शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की तुलना आणविक स्तर पर प्राकृतिक चयन से की है।
प्रो. सुमन चक्रबर्ती के नेतृत्व में दिब्येंदु मैती और शहीरा शाहिद द्वारा विकसित इस फ्रेमवर्क ने शुरुआती अध्ययनों में जटिल आणविक प्रणालियों में कई लिगैंड अनबाइंडिंग मार्गों की सफल पहचान की। इस पद्धति से यह समझा गया कि बेंजीन अणु टी4 लाइसोसोम एंजाइम के बाइंडिंग पॉकेट से कैसे बाहर निकलता है, साथ ही कैंसर रोधी दवा इमाटिनिब के एबल काइनेज से अलग होने के तीन अलग-अलग मार्ग भी सामने आए।
ये सभी मार्ग पहले किए गए प्रयोगात्मक अध्ययनों और पक्षपाती सिमुलेशन के परिणामों से मेल खाते हैं, लेकिन खास बात यह रही कि इन्हें किसी भी बाहरी बल को लागू किए बिना प्राप्त किया गया। यह पैथजेनी की सटीकता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ढांचा सामान्य प्रकृति का है और इसका उपयोग केवल दवा खोज तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल रासायनिक प्रतिक्रियाओं, उत्प्रेरक प्रक्रियाओं, चरण संक्रमणों और स्व-संयोजन जैसी घटनाओं के अध्ययन में भी किया जा सकता है। इसके अलावा, यह मशीन-लर्निंग आधारित मॉडलों के साथ भी संगत है, जिससे भविष्य में और अधिक उन्नत सिमुलेशन संभव हो सकेंगे।
