रायपुर, 24 जनवरी। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर में हुए मुआवजा घोटाले के मामले में एसीबी–ईओडब्ल्यू की टीम ने तीन लोकसेवकों के खिलाफ प्रथम पूरक चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रस्तुत किया है।
ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत यह कार्रवाई की गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 सी और 12 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 471, 420 और 120-बी के तहत आरोप दर्ज हैं। जांच में सामने आया है कि लोकसेवकों, मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और अन्य आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत भू-अर्जन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं।
आरोप है कि शासन द्वारा पूर्व में अर्जित भूमि को दोबारा शासन को विक्रय कर मुआवजा दिया गया, निजी भूमि पर गलत मुआवजा स्वीकृत किया गया, बैकडेट में बंटवारा और नामांतरण किए गए, भूमि स्वामी के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को मुआवजा दिलाया गया और कृत्रिम उपखंड बनाकर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) और बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों से साठगांठ कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। तीनों को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
जांच में सामने आई भूमिकाएं
दिनेश पटेल पर आरोप है कि उन्होंने खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10 और आपत्ति निराकरण की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखंडों में दर्शाया, जिससे अधिक मुआवजा भुगतान हुआ। इससे शासन को करीब 30.82 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
लेखराम देवांगन पर आरोप है कि उन्होंने मूल खसरों को कृत्रिम उपखंडों में दिखाकर वास्तविक देय राशि से कहीं अधिक मुआवजा दिलाया। इससे शासन को लगभग 7.16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बसंती घृतलहरे पर आरोप है कि उन्होंने अवार्ड चरण में मूल खसरों को कृत्रिम रूप से विभाजित दिखाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई, जिससे शासन को करीब 1.67 करोड़ रुपये की क्षति हुई।
एसीबी–ईओडब्ल्यू ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार तीनों लोकसेवकों के खिलाफ प्रथम पूरक चालान पेश किया जा चुका है, जबकि प्रकरण में अन्य आरोपियों के विरुद्ध विवेचना अभी जारी है।
