अक्सर लोग पीठ में होने वाले दर्द को सामान्य थकान या गलत बैठने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लंबे समय तक बैठना, भारी वजन उठाना या खराब लाइफस्टाइल इसकी आम वजह मानी जाती है. लेकिन हर बार पीठ दर्द इतना साधारण नहीं होता. कई बार यह किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है. किडनी शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है जो खून को साफ करने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. ऐसे में अगर इसमें किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो उसका असर दर्द के रूप में सामने आ सकता है. इसलिए इस दर्द को समझना और समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है.
क्या होता है किडनी पेन?
किडनी का दर्द आमतौर पर पसलियों के नीचे, पीठ के दोनों तरफ या एक तरफ महसूस होता है. यह दर्द अंदर की तरफ गहराई में होता है और कई बार पेट या जांघ की ओर भी फैल सकता है. कुछ लोगों को यह दर्द लगातार महसूस होता है, जबकि किडनी स्टोन की स्थिति में यह अचानक तेज होकर लहरों में आता है.
सामान्य दर्द से कैसे करें फर्क?
सामान्य पीठ दर्द और किडनी पेन के बीच अंतर समझना जरूरी है. मांसपेशियों का दर्द आमतौर पर पीठ के बीच हिस्से में होता है और आराम करने या पोजीशन बदलने से कम हो जाता है. वहीं किडनी का दर्द साइड में और गहराई में महसूस होता है और जल्दी ठीक नहीं होता. यह दर्द कई बार पेट या जांघ तक भी फैल सकता है.
किडनी दर्द के कारण
किडनी में दर्द कई कारणों से हो सकता है. सबसे आम कारण किडनी स्टोन और संक्रमण हैं. इसके अलावा यूरिन का रुक जाना, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, किडनी में सूजन या सिस्ट भी दर्द का कारण बन सकते हैं. कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर पीठ दर्द के साथ कुछ और लक्षण भी दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. जैसे पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून या धुंधलापन, बुखार, ठंड लगना, उल्टी या मतली. ये सभी संकेत बताते हैं कि समस्या सामान्य नहीं है.
कैसे होता है इलाज?
किडनी पेन का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है. संक्रमण होने पर दवाएं दी जाती हैं. किडनी स्टोन के मामलों में दवाओं से लेकर सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है.
पीठ दर्द को हल्के में लेना सही नहीं है. अगर दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है.
