राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में अपने वियतनामी समकक्ष तो लाम का स्वागत किया। उन्होंने अतिथि के सम्मान में भोज का आयोजन भी किया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत-वियतनाम संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने से न केवल द्विपक्षीय सहयोग को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में शांति और समृद्धि में भी योगदान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित गहरी मित्रता साझा करते हैं। राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में, भारत-वियतनाम द्विपक्षीय संबंध उच्च स्तरीय आदान-प्रदान, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, विकास साझेदारी और व्यापार, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में विस्तारित हुए हैं। उन्होंने इस यात्रा के दौरान दुर्लभ खनिज, डिजिटल एवं वित्तीय प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए समझौतों और घोषणाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की।
राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत और वियतनाम ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर संयुक्त वक्तव्य के माध्यम से संबंधों को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और भारत संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से व्यापार को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आसियान के साथ हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढांचे के भीतर, वियतनाम के साथ संबंध भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत महासागर पहल में वियतनाम की भागीदारी की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा भारत-वियतनाम द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए वियतनाम के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और वियतनाम के बीच घनिष्ठ सहयोग से दोनों देशों के लोगों को अपार लाभ मिल सकता है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति तो लाम के नेतृत्व में भारत-वियतनाम संबंध और भी मजबूत होंगे।
