रुड़की, 04 अगस्त । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के शोधकर्ताओं ने नवीकरणीय अल्कोहलों को उच्च-मूल्य रसायनों में बदलने की एक नई सतत उत्प्रेरक विधि विकसित की है। यह विधि दवाओं और उन्नत सामग्रियों में उपयोग होने वाले जटिल रसायनों के निर्माण के लिए स्वच्छ विकल्प देती है। यह शोध प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।
यह अध्ययन रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. देबाशीष बनर्जी के नेतृत्व में किया गया। इसमें आईआईटी रुड़की के शोध छात्र आद्रिजा घोष और पुरुषोत्तम तथा कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रो. चाओ-जुन ली ने सहयोग किया। टीम ने लिगैंड-सक्षम निकेल उत्प्रेरक का उपयोग कर जैव-आधारित अल्कोहलों को ट्राइसब्स्टीट्यूटेड ओलेफिन्स और 1,3-डाइन्स में बदला। ये दोनों रसायन औषधियों और उन्नत कार्बनिक सामग्रियों के महत्वपूर्ण आधारभूत अवयव हैं।
पारंपरिक संश्लेषण में कई चरण और महंगे उत्प्रेरक लगते हैं। इस पद्धति में पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध निकेल का उपयोग कर नवीकरणीय कच्चे पदार्थों से उच्च स्टीरियो-चयनात्मकता प्राप्त की गई। शोध में 27 ट्राइसब्स्टीट्यूटेड ओलेफिन्स और 23 उच्च-चयनात्मक 1,3-डाइन्स का सफल संश्लेषण किया गया।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि यह शोध स्वच्छ और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. बनर्जी ने कहा कि इसका उद्देश्य आसानी से उपलब्ध नवीकरणीय अल्कोहलों को किफायती उत्प्रेरक से जटिल अणुओं में बदलना था।
