आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंदक ने सेमीकॉन 2.0 की अधिसूचना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के तुरंत बाद योजना को अधिसूचित किया जाना सरकार की नीति निरंतरता और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश लंबे समय के लिए किया जाता है और आमतौर पर निवेशक 10 से 15 वर्षों के नजरिए से फैसले लेते हैं। ऐसे में नीतिगत स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। इससे घरेलू और वैश्विक निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।
आईईएसए के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण ने देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। इसके तहत अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 100 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप को सहयोग मिला है और शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए उपकरणों तक पहुंच बढ़ाई गई है।
सेमीकॉन 2.0 की खासियत इसका व्यापक दायरा है। योजना के तहत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग के साथ-साथ उपकरण एवं सामग्री निर्माण, अनुसंधान एवं विकास और कुशल मानव संसाधन के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। यानी सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
आईईएसए ने रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान के लिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाए जाने के फैसले का भी स्वागत किया है। संगठन के अनुसार, इससे सरकारी प्रोत्साहन को देश की रणनीतिक जरूरतों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
अशोक चंदक ने कहा कि मौजूदा निवेश पाइपलाइन और सेमीकॉन 2.0 के व्यापक दायरे को देखते हुए योजना के तहत पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित होने की संभावना है। यह निवेश फैब्रिकेशन इकाइयों, एटीएमपी और ओसैट सुविधाओं, उपकरण एवं सामग्री निर्माण, आरएंडडी, चिप डिजाइन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े क्षेत्रों में आ सकता है।
आईईएसए का कहना है कि सरकार की वित्तीय सहायता को केवल सब्सिडी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करने वाले उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है। सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ मशीनरी, विशेष रसायनों, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और उच्च कौशल वाले मानव संसाधनों की मांग बढ़ेगी। इससे प्रत्यक्ष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र के साथ-साथ उससे जुड़े कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा।
उद्योग संगठन ने सेमीकॉन 2.0 को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स जैसी अन्य सरकारी पहलों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत बताई है। आईईएसए के मुताबिक, इन योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से घरेलू मूल्य संवर्धन, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है।
आईईएसए ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा और पूरी मंत्रालयी टीम को योजना के लिए बधाई दी है। सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन 2.0 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया। योजना का उद्देश्य सेमीकंडक्टर डिजाइन से लेकर चिप निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण, उपकरण निर्माण, अनुसंधान और कुशल प्रतिभा विकास तक पूरे क्षेत्र को वित्तीय और नीतिगत समर्थन देना है।
