केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों को भारत में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 पर बहस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर रोहिंग्या या बांग्लादेशी भारत में अशांति फैलाने के लिए आते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। श्री शाह ने कहा कि देश कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी अपनी मर्जी से रह सकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए सरकार को यह जानना जरूरी है कि कौन देश में प्रवेश कर रहा है, कितने समय के लिए और किन कारणों से। उन्होंने कहा कि ये अवधारणाएं नई नहीं हैं, ऐसे अधिकारों का उल्लेख विभिन्न कानूनों में किया गया है और सरकार ने अब उन्हें एकीकृत कर दिया है। श्री शाह ने कहा कि आव्रजन और विदेशी विधेयक के साथ सरकार देश में प्रवेश करने वाले प्रत्येक विदेशी को ट्रैक करने के लिए एक विस्तृत और संरचित प्रणाली स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि इससे देश के विकास में मदद मिलेगी और व्यापार के लिए आने वालों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। गृह मंत्री ने कहा कि इससे सरकार को उन व्यक्तियों पर भी कड़ी नजर रखने में मदद मिलेगी जो सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं, जिससे लोगों को परेशान किया जा सकता है। श्री तिवारी ने विधेयक में सुरक्षा प्रावधान लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मांग की कि विधेयक को और अधिक जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए।
बाद में यह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक का उद्देश्य आव्रजन कानूनों को आधुनिक बनाना है और इसमें पासपोर्ट, यात्रा दस्तावेज, वीजा और पंजीकरण के संबंध में केंद्र सरकार को कुछ शक्तियां प्रदान करने का प्रावधान है। यह विधेयक कानूनों की बहुलता और ओवरलैपिंग से बचने के लिए लाया गया है।
