नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज कहा कि कुछ सदस्यों के विशेष उल्लेख के नोटिस को अनुमति नहीं देने के बारे में मेरे फैसले के संबंध में नेता प्रतिपक्ष आतिशी से एक पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पत्र उन्हें मिलने से पहले ही उसकी जानकारी मीडिया में आ गई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। विपक्षी सदस्यों की यह आदत बन गई है कि वे अपनी शिकायत उन्हें बताने की बजाय सबसे पहले मीडिया के पास जाते हैं। प्रतिपक्ष के सदस्यों को यह चेतावनी देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि वे ऐसा कोई कार्य न करें, जो अध्यक्ष पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता हो।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन के सदस्यों को केवल उन विषयों पर सवाल पूछने चाहिए या चर्चा करनी चाहिए, जिनका मंत्री उत्तर दे सकते हैं या उन पर कोई कार्रवाई कर सकते हैं।
हालांकि, सदन में उठाए जाने वाले मामले के विषय को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष आरक्षित विषयों पर भी नोटिस की अनुमति केवल तब दे सकते हैं, जब उन्हें लगता है कि यह दिल्ली के लोगों को प्रभावित करने वाला बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण मामला है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रतिपक्ष के जिन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया गया, वे महज सदन की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और सदन में संगठित व्यवधान पैदा करने का प्रयास थे। विशेष उल्लेख के तहत उठाए जाने वाले मामले तत्काल सार्वजनिक महत्व के विषयों से सम्बन्धित होते हैं। प्रतिपक्ष के सदस्य जनता के सामने आने वाले वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय व्यवधान पैदा करने में अधिक रुचि रखते हैं। वे गर्मियों के लिए सरकार की तैयारी, वेक्टर जनित बीमारियों, डेंगू से निपटने की तैयारी, प्रदूषण कम करने के कदम, जल भराव, सफाई व्यवस्था, कूड़े के ढेर आदि जनहित से जुड़े मुद्दे उठा सकते हैं। इसकी बजाय विपक्षी सदस्यों का ध्यान सिर्फ मीडिया का ध्यान आकर्षित करने और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर ज्यादा रहता है।
उन्होंने कहा कि हमारे नियमों में विशेष उल्लेख का कोई प्रावधान नहीं है। दिल्ली विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 280 के अनुसार जो सदस्य सदन की जानकारी में कोई ऐसा विषय लाना चाहें, जो व्यवस्था का प्रश्न न हो तो वह सचिव को लिखित रूप में सूचना देंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा, राज्यसभा में निर्धारित विशेष उल्लेख के नियमों का पालन करती रही है। राज्यसभा नियमों के नियम 180 बी (II) के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विशेष उल्लेख का विषय उस मामले को संदर्भित नहीं करेगा जो मुख्य रूप से सरकार के विचार का विषय नहीं है। नियम 180 बी (iii) के अनुसार यह उस मामले को संदर्भित नहीं करेगा, जो पहले से उठाए गए मामले के समान है। इसलिए, उन्होंने सचिवालय को यह निर्देश दिया कि ऐसे मामलों को अनुमति न दी जाए जो दोहराए गए हों या जो सदन में संगठित व्यवधान पैदा करने का प्रयास हों।
