नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अब सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने जा रही है। दिल्ली पुलिस को इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय की ओर से 75 निगरानी ड्रोन मिले हैं। इन ड्रोन का उपयोग पुलिस अपराध की निगरानी, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और आपदा राहत जैसे कार्यों में करेगी। दिल्ली पुलिस को इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए कुल 75 ड्रोन सौंपे गए हैं। जिनमें 1 बड़ा, 15 मीडियम और 59 छोटे ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन विश्वविद्यालय की छात्राओं ने एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था के सहयोग से तैयार किए हैं। यह साझेदारी तकनीकी शिक्षा और पुलिसिंग के संगम का प्रतीक मानी जा रही है।
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली पुलिस की 108 महिला पुलिसकर्मियों को इन ड्रोन के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल को ‘नेत्रा-नेतृत्व-नारी’ नाम दिया गया है, जो महिलाओं की तकनीक-प्रधान पुलिसिंग में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। ये ड्रोन दिल्ली के सभी 15 जिलों और विशेष इकाइयों जैसे क्राइम ब्रांच, ट्रैफिक पुलिस, रेलवे और मेट्रो यूनिट्स में तैनात किए जाएंगे। इनका उपयोग अपराध स्थल के दस्तावेज़ी करण, भीड़ नियंत्रण, त्योहारों के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन में किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने ड्रोन संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है, जिसके तहत निजता, डेटा सुरक्षा और मानवाधिकार कानूनों का पूर्ण पालन किया जाएगा। ड्रोन का उपयोग किसी भी प्रकार की निजी निगरानी या अवैध फेस रिकग्निशन के लिए नहीं किया जाएगा।
सोमवार को आईजीडीटीडब्ल्यू के सभागार में आयोजित एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में विशेष पुलिस आयुक्त (क्राइम) देवेेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह समझौता पुलिस की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता डेटा एनालिटिक्स, इमेज प्रोसेसिंग, ब्लॉकचेन और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में पुलिस को सहयोग देगी। यह पहल ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान से भी जुड़ी है और राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा तथा समग्र पुलिसिंग को सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
