भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देश भर की अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए एक खाका तैयार करने और इसके लिए सरकार से 40 से 50 हजार करोड़ रुपये का आवंटन सुनिश्चित करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है। ‘न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति’ सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करके अदालतों में अवसंरचना संबंधी कमियों को दूर करेगी। न्यायमूर्ति कुमार के अलावा, समिति में कलकत्ता, पंजाब और हरियाणा तथा बॉम्बे उच्च न्यायालयों के न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक, अश्वनी कुमार मिश्रा और सोमशेखर सुंदरेशन शामिल होंगे। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के महानिदेशक और सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव भी इस समिति के सदस्य होंगे।
समिति को इस वर्ष 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को अपने विस्तृत निष्कर्ष और निधि आवश्यकताओं को प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है। यह समिति सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिनमें व्यवस्थागत बाधाओं की पहचान करना, वादियों और वकीलों के लिए सुविधाओं में सुधार करना और मुकदमों के निपटारे में तेजी लाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का कार्यान्वयन करना शामिल है। समिति डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए ई-कोर्ट पहल और 21वीं सदी के लिए डिज़ाइन किए गए आधुनिक न्यायालय परिसरों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।
