सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2025-26 में एक लाख 98 हजार करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो लगातार चौथे वर्ष लाभ का संकेत है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती, स्थिरता और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता को दर्शाता है। इन बैंकों का कुल कारोबार इस वर्ष मार्च तक बढ़कर 283 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है। कुल जमा राशि में भी 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 156 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई, जो जमाकर्ताओं के निरंतर विश्वास और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा मजबूत संसाधन जुटाने को दर्शाती है।
मंत्रालय ने कहा कि 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे सकल निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत हो गया है। बट्टे खाते में डाले गए खातों से वसूली सहित कुल वसूली 86 हजार 971 करोड़ रुपये रही, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बेहतर वसूली तंत्र और बेहतर ऋण अनुशासन को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत, लाभदायक और संस्थागत रूप से मजबूत हैं, जिससे वे भारत की विकास आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से समर्थन देने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में सार्थक योगदान देने में सक्षम हैं।
