रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है, क्योंकि पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये और निर्यात बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा मंत्री ने मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुराने वाहन कारखाने (वीएफजे) में टी-सीरीज युद्धक टैंकों के नवीनीकरण के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एक नई सुविधा की आधारशिला रखने के बाद ये बातें कहीं।
श्री सिंह ने कहा कि सरकार ने 2028-29 वित्तीय वर्ष तक 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल घरेलू स्तर पर हथियारों का निर्माण कर रहा है, बल्कि उनके रखरखाव, मरम्मत और उन्नयन की क्षमता भी विकसित कर रहा है।
उन्होंने टैंक मरम्मत परियोजना को भारत के आत्मनिर्भर औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सुविधा समय पर और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी परियोजना के तहत प्रतिवर्ष 80 टी-72 और टी-90 टैंकों की मरम्मत की जाएगी। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को प्रति वर्ष लगभग 230 ऐसे टैंकों की मरम्मत की आवश्यकता होती है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि अवादी स्थित भारी वाहन कारखाना (एचवीएफ) वर्तमान में प्रति वर्ष लगभग 150 टैंकों की मरम्मत करता है और वीएफजे में नई सुविधा शेष कमी को पूरा करेगी।
1969 में स्थापित वीएफजे ने शुरू में जर्मनी की एमएएन के सहयोग से शक्तिमान 3-टन वाहन और जापान की निसान मोटर्स कंपनी के सहयोग से निसान 1टी और जोंगा वाहन बनाए।
अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री परिसर 330 एकड़ में फैला हुआ है, जबकि इसकी समीपवर्ती संपत्ति 600 एकड़ में फैली हुई है।
