केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टेपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल युक्त अस्वीकृत संयोजन दवाओं के निर्यात के बारे में चिंताओं को उजागर करने वाली कुछ समाचार रिपोर्टों के बाद तत्काल कार्रवाई की है। यह कार्रवाई नई रिपोर्टों के बाद की गई है कि मुंबई स्थित एक भारतीय दवा निर्माता ने इन दवाओं को पश्चिम अफ्रीका के कुछ देशों में निर्यात किया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और महाराष्ट्र राज्य नियामक प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने दवा निर्माण स्थल का गहन ऑडिट किया। ऑडिट के निष्कर्षों के आधार पर कंपनी के परिसर में सभी परिचालनों को रोकने के लिए स्टॉप एक्टिविटी ऑर्डर जारी किया गया। संबंधित दवा संयोजनों के निर्माण को रोकने के लिए दवा कंपनी को स्टॉप प्रोडक्शन ऑर्डर भी जारी किया गया।
सीडीएससीओ ने टेपेंटाडोल-कैरिसोप्रोडोल संयोजनों के लिए निर्यात एनओसी और विनिर्माण लाइसेंस को तत्काल वापस लेने का भी प्रस्ताव रखा। मंत्रालय ने कहा कि भारत, फार्मास्यूटिकल्स के एक अग्रणी वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में, दवा सुरक्षा और विनियामक अनुपालन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए समर्पित है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता और वैश्विक समुदाय को आश्वासन दिया है कि सरकार भारत में निर्मित दवाओं के किसी भी दुरुपयोग से बचाव के लिए फार्मास्यूटिकल निर्यात की निगरानी और विनियमन करना जारी रखेगी।
इस विशेष मुद्दे के बारे में, टैपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल दोनों को भारत में CDSCO द्वारा व्यक्तिगत रूप से अनुमोदित किया गया है। टैपेंटाडोल को 50, 75 और 100 मिलीग्राम की गोलियों के साथ-साथ 100, 150 और 200 मिलीग्राम की विस्तारित-रिलीज़ गोलियों के रूप में भी अनुमोदित किया गया है। हालाँकि, टैपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल के संयोजन को भारत में अनुमोदित नहीं किया गया है। इनमें से कोई भी दवा भारत में NDPS (नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ) सूची में शामिल नहीं है।
